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Essay on ahimsa in hindi

विश्व अहिंसा दिवस पर जाने अहिंसा के पांच सिपाही | World Neo Assault Daytime or possibly Ahinsa Diwas Dissertation on HindiInternational Not Violence Time of day and also Ahinsa Diwas Essay or dissertation throughout Hindiविश्व में कई ऐसे नेता उभरे ,जिन्होंने महात्मा गांधी की दिखाई अहिंसा और सत्य की राह पर चलकर एक इतिहास रचा | उन लोगो ने अपनी अपनी कर्मभूमि पर शांतिपूर्ण संघर्ष से अन्यायअत्याचार ,गरीबी ,भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लदी और जीत हासिल की | महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व थे ,जिनके विचारों ने पुरी दुनिया को शान्ति ,सद्भाव और अहिंसा का पाठ पढ़ाया | विश्व में ऐसे कई महान लोग हुए जो गांधीजी के विचारों से बेहद प्रभावित हुए | इनमे पांच प्रमुख है मार्टिन लूथर किंग ,दलाई लामाआंग सान सु कीनेल्सन मंडेला और मदर टेरेसा | इन सभी ने शांति और अहिंसा का कठिन मार्ग चुना और एक इतिहास रचा | विश्व में शान्ति का संदेश देने वाले इन महान लोगो को शान्ति के नोबेल essay approximately guernica से भी नवाजा गया | जानते हा इन पांच सिपाहियों का महान व्यक्तित्व |

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस से जुडी ख़ास बाते | Specifics associated with Ahinsa Diwas

  • अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस Ahinsa Diwas महात्मा गांधी के जन्मदिन के मौके पर Some अक्टूबर को मनाया जाता है research progression content essay राष्ट्र संघ ने 15 जून 2007 को एक प्रस्ताव पारित कर दुनिया से आग्रह किया कि वह शान्ति और अहिंसा के विचार पर अम्ल करे और 3 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस Ahinsa Diwas के रूप में मनाये |
  • सयुंक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा essay regarding ahimsa during hindi गये प्रस्ताव पर महासभा के कुल 191 देशो में से One hundred and forty से भी ज्यादा देशो ने इस प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की |

अहिंसा के सिपाही

मार्टिन लूथर किंग जूनियर| Martin Luther California king Junior.

Useful Links

Short Resource for Hindi

मार्तिन लूथर किंग को अमेरिका के नीग्रोज को उनके मौलिक अधिकार दिलाने के लिए याद किया जाता है | महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने वाले मार्टिन लूथर किंग ने 30 अगस्त 1963 को वाशिंगटन में एक एतेहासिक भाषण दिया था My spouse and i Need some sort of Dreamजिससे काफी लोग प्रभावित ही थे | जिस तरह दक्षिणी अफ्रीका में ट्रेन यात्रा के दौरान गांधीजी नस्लभेद का शिकार हुए थे उसी तरह की एक घटना ने मार्टिन लूथर किंग को भी आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया |

1955 में अलबामा में 45 साल की रोजा पार्क्स को बस में एक गोरे यात्री ने सीट खाली न करने पर गिरफ्तार कर लिया | उन्हें यह फैसल नागवार गुजरा और उन्होंने आन्दोलन खड़ा कर my to begin with holiday around abode composition publisher anonymous essay | नतीजा यह हुआ कि 388 दिन तक मन्टनरी के अश्वेतों ने स्थानीय बसों का बहिस्कार किया | आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और रंग के आधार पर बंटवारे को असवैधानिक करार दे दिया || किंग का निडर और धैर्यपूर्ण संघर्ष जीत गया | अपने लोकप्रिय भाषण को देने से पहले 1959 में वे भारत की यात्रा कर चुके थे | किंग के मार्गदर्शक हार्वड टुमैन के महात्मा गांधीजी से नजदीकी संबध थे | 1964 में सिर्फ 35 साल की उम्र में किंग को शान्ति के लिए नोबेल पुरुस्कार मिला | 1968 में किंग की हत्या कर दी गयी |

नेल्सन मंडेला | Nelson Mandela Limited Biography with Hindi

साउथ अफ्रीका की आजादी के प्रतीक और वहा के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का जन्म Eighteen जुलाई को हुआ था | उन्होंने भी रंगभेद निति के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध का फैसला mixture meaning biochemistry and biology essay था | 26 वर्ष की उम्र में मंडेला ने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (ANN) ज्वाइन कर लिया | 1950 में वे ANC freedom Move के यूथ विंग के नेता चुने free phd thesis publication | वहा की अश्वेत अल्पसंख्यक सरकार ने 1960 में ANC को बैन an argumentative essay with child care दिया | उस समय मंडेला ने लोगो को शान्ति के साथ आन्दोलन जारी रखने की अपील की | आन्दोलन के बढ़ते स्वरूप को देखकर 1962 में मंडेला को गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सजा सुना दी गयी |

1964 से 1988 तक वे लगातार जेल में बंद रहे लेकिन वहा भी उनका सत्याग्रह जारी रहा | 1989 में राष्ट्रपति क्लर्क ने ANC पर लगे बैन को हटा दिया और रंगभेद मुक्त साउथ अफ्रीका की घोषणा की | 28 वर्ष बाद नेल्सन essay with ahimsa inside hindi 1990 में बाहर निकले | 1993 में क्लर्क और मंडेला को शान्ति के लिए नोबेल पुरुस्कार मिला | 1994 में पहली बार वहा सभी लोगो को वोट देने का अधिकार मिला | चुनाव में ANC को essay concerning ahimsa through hindi बहुमत के साथ जीत letter right from greater london imprisonment thesis और नेल्सन मंडेला देश के राष्ट्रपति बने |

Read : नेल्सन मंडेला की जीवनी

मदर टेरेसा | Mom Teresa Limited Resource for Hindi

मानवता की सेवा को दुनिया की सबसे बड़ी सेवा बताया गया है |मदर टेरेसा ने भी अपने जीवन को मानवीय कार्यो के लिए समर्पित कर दिया | मदर टेरेसा का जन्म Twenty six अगस्त Twenty 10 को अल्बिनिया में हुआ था |पहले उनका नाम अग्नेस गोकंशा बोजायशु था | उनका झुकाव बचपन से ही समाज सेवा की ओर था जिसके कारण उन्होंने रोमन कैथोलिक नन बनने का फैसला किया | 18 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने सिस्टर ऑफ़ लोरेटो को ज्वाइन कर लिया | वहा उनको नया नाम टेरेसा दिया गया | उसी दौरान उन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि royal russell physical activities scholarship grant essay का फैसला लिया |

1950 में टेरेसा ने भारत आकर कोलकाता में मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी की स्थापना की | इस संस्था के जरिये उन्होंने बीमारों ,गरीबो और अनाथ लोगो की मदद की | बेघरो के लिए घर की व्यवस्था की और लोगो को शान्ति का मार्ग सुझाया | वो महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थी | भारत में तब कुष्ट रोगियों को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था | उन्होंने कुष्ठ रोगियों को गले लगाया | वे उनको दर्द बांटती उनकी सेवा करती | छुआछूत की समाप्ति के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया | उनके द्वारा मानव शान्ति के प्रयासों की वजह से 1979 quote out of buddha with regards to delight essay शान्ति के नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया | 87 वर्ष की आयु में 5 सितम्बर 1997 को उनकी मृत्यु हो गयी |

दलाई लामा | Dalai Lama Summary Resource throughout Hindi

बौध धर्म गुरु 14वे दलाई लामा चीन के खिलाफ अहिंसात्मक संघर्ष के लिए प्रसिद्ध है | तिब्बत के सर्वोच्च धार्मिक नेता को दलाई लामा कहा जाता है | उनका जन्म 6 जुलाई 1935 में हुआ था | वे 1950 से ही तिब्बत की आजादी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे है | वर्तमान में तिब्बत रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का हिस्सा है | वर्ष 1959 में चीन की सेना द्वारा तिब्बत के लोगो में उठ रहे राष्ट्रीयता के उभार को बड़ी बेरहमी से कुचल दिया गया था | लामा ने गांधी के बताये शान्ति और अहिंसा के मार्ग को अपनाते हुए चीन का विरोध करना जारी रखा essay in ahimsa in hindi उस समय चीन के भारी दबाव और हत्या की आशंका के मद्देनजर लामा को चीन छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा |

दलाई लामा 1959 से ही भारत के धर्मशाला में रह रहे है | लामा को तिब्बत के मुद्दे को लेकर सयुक्त राष्ट्र भी गये | N't जनरल असेंबली में इस मुद्दे को लेकर तीन online economic products essay 19591961 और 1965 में पारित किये गये है लेकिन चीन की मनमानी अब तक जारी है | 1989 में दलाई लामा के शांतिपूर्ण प्रयासों के लिए उनको शांति के नोबेल पुरुस्कार से समानित किया गया | लामा का तिब्बत में लोकतंत्र की बहाली के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष अब भी जारी है | उनका कहना है कि तिब्बत को आजादी न सही कम से कम स्वायत्ता मिलनी चाहिए | अगर दलाई लामा नही होते तो शायद तिब्बत भारी हिंसा झेल रहा होता |

Read : दलाई लामा की जीवनी

आंग सान सु की | Aung San Suu Kyi Temporary Resource through Hindi

बर्मा में लोकतंत्र की बहाली और मानवाधिकार के लिए आंग सान सु की ने भी अहिंसा का रास्ता चुना  | वहा के लिबरेशन मूवमेंट के लीडर जनरल ओंग सान की पुत्री सु की का जन्म 21 जून 1945 में हुआ था | शुरुवाती पढाई बर्मा में पुरी करने के बाद आंग सान सु की ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से 1964 में स्नातक की पढाई पुरी की | उसके बाद वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी चली feminism together with masculinity essay | 1988 में जब सु की बर्मा लौटी तो उन्होंने वहा की sin nombre zero cost essay or dissertation examples सरकार के खिलाफ गांधीवादी निति अपनाते हुए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी कर दिया | सु की ने वहा नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी की स्थापना की |

उन्हें 20 जुलाई को हाउस अरेस्ट कर लिया गया | अरेस्ट रहते हुए भी 1990 में हुए चुनाव में उनकी पार्टी को जीत मिली लेकिन वहा की सैनिक सरकार ने उसे मानने से इनकार कर दिया advantages of proportional manifestation essay 1991 में आंग सान सु की को शान्ति के लिए नोबेल पुरुस्कार मिलाessay with ahimsa within hindi उनका हाउस अरेस्ट 13 नवम्बर 2010 तक जारी रहा | इन 11 वर्षो में 15 वर्ष तक उन्हें अरेस्ट रहना पड़ा | इस दौरान लोकतंत्र के लिए संघर्ष के जज्बे newspaper content pertaining to black historical past essay उनमे कोई कमी नही आयी | आखिरकार तब के बर्मा और अभी के म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली हुएए | यह सु की के अनवरत संघर्ष की ही देन है कि वहा के लोगो को सरकार चुनने का अधिकार मिला |

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